Rimpi Bhatia
Drama
पलट के देख,
वो सुनहरा सफर,
जो तय किया तूने
वो भी कुछ
कम नहीं था ना।
यही एक मार्ग ...
पुरानी तस्वीर
सफर
समझना जरूरी है कीमत प्रकृति की, वक्त गुजर रहा है मुट्ठी में बंद रेत की तरह।। समझना जरूरी है कीमत प्रकृति की, वक्त गुजर रहा है मुट्ठी में बंद रेत की तरह।।
बस फर्क इतना है कि इसे देखने के लिए लोग नहीं है। बस फर्क इतना है कि इसे देखने के लिए लोग नहीं है।
इनको मेरी जिंदगी में घुसपैठ करने की और मुझे इनकी मर्जी से चलने की। इनको मेरी जिंदगी में घुसपैठ करने की और मुझे इनकी मर्जी से चलने की।
हम खुद से थोड़ा दूर हुए और सबको भाने लग गए। हम खुद से थोड़ा दूर हुए और सबको भाने लग गए।
पशु होते अबोध बच्चे सम ईर्ष्या-द्वेष निंदा से दूर पशु अच्छे हैं मानव से जीवन जीते हैं भरपू... पशु होते अबोध बच्चे सम ईर्ष्या-द्वेष निंदा से दूर पशु अच्छे हैं मानव से ...
शराब का शौकिन बस शराब पीता हूँ शराब जिंदाबाद हर शराबी का नारा है, हमारे जीने का यही एक सहारा ह... शराब का शौकिन बस शराब पीता हूँ शराब जिंदाबाद हर शराबी का नारा है, हमारे जी...
थोड़ा ज़ख्मों पर नमक डाल रहीं हूँ.. थोड़ा, हाँ थोड़ा दर्द पाल रहीं हूँ ! थोड़ा ज़ख्मों पर नमक डाल रहीं हूँ.. थोड़ा, हाँ थोड़ा दर्द पाल रहीं हूँ !
हृदय के प्रकोष्ठ में रख लो इन को। हृदय के प्रकोष्ठ में रख लो इन को।
वक़्त का सब शोर ही करते रह गए, वह था कि चुपके से निकल गया। वक़्त का सब शोर ही करते रह गए, वह था कि चुपके से निकल गया।
आज मै पौधों से एक बात पूछता हूं, उनकी नजरों में अपनी औकात पूछता हूं। आज मै पौधों से एक बात पूछता हूं, उनकी नजरों में अपनी औकात पूछता हूं।
तब थरथराते हुए, वज़ूद दुआओं में लीन, होकर ख़ुदा को आवाज़ देते है ! तब थरथराते हुए, वज़ूद दुआओं में लीन, होकर ख़ुदा को आवाज़ देते है !
समय बदला, बदल गया जमाना, अब बदलो अपनी सोच भी, बेटी ढूंढों, वधू नहीं ! समय बदला, बदल गया जमाना, अब बदलो अपनी सोच भी, बेटी ढूंढों, वधू नह...
बड़ी पुरानी कहानी है, रानी सिर्फ राजा की दिवानी है। बड़ी पुरानी कहानी है, रानी सिर्फ राजा की दिवानी है।
छलक उठी है आँखें माँ-बाबा की ! छलक उठी है आँखें माँ-बाबा की !
नेकी करके हाथो को जलाना ही है। नेकी करके हाथो को जलाना ही है।
वह अब उस पर इल्जाम लगाता की बदल गई है वो पहले सी नहीं रही...। वह अब उस पर इल्जाम लगाता की बदल गई है वो पहले सी नहीं रही...।
सच अभी इतनी भी देर नहीं हुई। सच अभी इतनी भी देर नहीं हुई।
हम जीतकर भी हारने की खुशी मना लेते हैं तो इसमें दोष हमारा है। हम जीतकर भी हारने की खुशी मना लेते हैं तो इसमें दोष हमारा है।
कभी बुलाने पर सुनता नहीं था जो हमको, हाथ जोड़े वो इसी गाँव चला आता है। कभी बुलाने पर सुनता नहीं था जो हमको, हाथ जोड़े वो इसी गाँव चला आता है।
हरियाली हरियाली कितनी हैं ये अच्छी हमारे मन को लुभाती दिल को सूकून देती। हरियाली हरियाली कितनी हैं ये अच्छी हमारे मन को लुभाती दिल को सूकून देती।