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सीमा शर्मा सृजिता

Abstract Inspirational

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सीमा शर्मा सृजिता

Abstract Inspirational

सफलता

सफलता

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अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा चुकी हूं उम्मीदों का दामन थामे

बस चल पड़ी हूं 

सफलता से गले मिलने को

बहुत बेकरार हूं 

राह की चुनौतियों सुनो! 

मैं तैयार हूं 

तुम थका सकती हो मुझे

हरा कभी न पाओगी 

जितना मुझे गिराओगी 

मेरी हिम्मत को बढ़ाओगी

लेकर चली हूं संकल्प ये 

ना अब कभी डरना मुझे 

आयेंगी जो भी मुश्किलें

हंसकर अभी लड़ना मुझे 

मैं शक्ति का भंडार हूं 

छू लो तो मैं अंगार हूं 

जो ठान लूं करना ही है 

जी लूं अभी मरना ही है 

सफलता के फूल चुन लूंगी 

कांटों भरी उस डाल से 

मिल जायेगी एक बार जो 

रख लूंगी मैं संभाल के।



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