सोने का साम्राज्य
सोने का साम्राज्य
कन्याकुमारी से हिमालय तक फैला हु़आ साम्राज्य,
विविधताओं में लिपटे हुये हैं अनेकों खूबसूरत राज्य,
ना जाने कहॉं से कुटिल दृष्टि लिये दुश्मन की पड़ी नज़र,
फतह करने को एक खूबसूरत सा देश निकल पड़े इधर..!
सोने की चिड़िया का साम्राज्य चहुं दिशाओं में गुंजित था,
नोचने को पंख उसके लार टपकाता दुश्मन बड़ा जहर था,
मित्र बन कर आये कई कईयों ने सेना संग आक्रमण किया,
लहूलुहान चिड़िया ने जब कराह कर दुख भरा आह किया..!
बचाने को निकल पड़े लाडले सर पर बॉंधे कफन तैयार,
चाहे कुछ भी हो जाये जाने ना देंगे अब कुर्बानी बेकार,
सिकंदर ,गौरी,अंग्रेजों सहित कितनों नें नेस्तनाबूत करने की ठानी,
भारत के वीर जवानों नें लहू बहा मातृभूमि लाल लाल रंग डाली
दुश्मन के हा़थ ना आने देंगे यह जो विजय साम्राज्य हमारा है,
नैनों को वहीं मसल देंगे जो बुरी नज़र इस पर डाला है,
माता कहते हैं हम इसको रक्षा हेतु इसके लाल मर मिटेंगे,
अब चाहे फॉंसी हो या सूली मरने से वीर सपूत नहीं डरेंगे..!
जिसने भी ऑंख उठाई है उसने ही बुरी तरह मुंह की खाई है,
इस पर नापाक पैर वही धरे जिसकी अब शामत आई है,
खदेड़ दिया पावन धरा से दु़श्मन के मैले जमते पॉंवों को,
धीरे धीरे भर ही लेंगे लगे जो शरीर पर उन घावों को..!
रणभेरी बज उठी लहर लहर विजय पताका लहराई,
दूर तलक जो दे सुनाई जीत की शहनाई है बजाई,
धन्य धन्य हे मातृभूमि ऑंच ना तुझ पर कभी आने देंगे,
तुझे लूट कर जो भागना चाहे उसको ऐसे क्या जाने देंगे..!
