STORYMIRROR

S N Sharma

Abstract Classics Inspirational

4  

S N Sharma

Abstract Classics Inspirational

संवाद

संवाद

1 min
11

जब जब भी हम अपनों से बातें करना बंद करें ।
बिन बोलें मन ही मन उनसे कितना संवाद करें ।

मन अपना भर जाता है जब नेगेटिव विचारों से।
तन जलता मन जलता है तब कल्पितअंगारों से।

घर की एनर्जी तब मित्रों इतनी भारी हो जाती है।
सब तनाव भर जाते हैं बच्चों की शामत आती है।

जिन अपनों की बीमारी में गहने घरबार बेच दें हम।
उन्हीं से संवादहीन होकर ही विनाश मति आती है।

संवादहीन होकर जब हम अपनों को दुख देते हैं।
खुद भी बीमारी लेते हैं उनको दुख बीमारी देते हैं।

संवाद सदा करते रहना मन के विकार धुल जाएंगे।
आज नहीं तो कल यारो हम फिर सच्चा सुख पाएंगे।
शिवा
भोपाल



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract