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Varsha Divakar

Inspirational

4  

Varsha Divakar

Inspirational

संसार 🥰🥰

संसार 🥰🥰

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मन था मेरा बहुत उदास किसी दिन....

सुनी थी कहीं किसी इंसान को कहते अ

गरलगे मन उदास तब भगवान् से बाते कर लेना

लगे कभी रोने का मन..... तब उस ऊपर वाले के पास बैठ रो लेना..........हु

आ भी कुछ यूँ ही...... एक ऊपर वाले के अलावा

कोई और दिखा नहीं मेरे नजरों में

झट से गई उनके चरण औरआँ

सुओं का जल उनके चढ़ा बैठीं.......


था ना मेरे पास भगवान् जी को कुछ अर्पण करने के लिए

मैंने अपना सर्वस्व अर्पण उनके चरण कर बैठीं.....

यूँ सुंदर फूलों से सजी एक माला तो नही था मेरे पास

भगवान् जी के चरणों में अर्पित करने के लिए

मैंने श्रद्धा रूपी फूल उनके चरण अर्पित कर बैठीं

न था मेरे पास.... पैसों से भरी कोई थैली

उनके चरण चढ़ाने के लिए........

मैं दुख का सागर उनके चरण चढ़ा बैठीं

मैं आँसुओं का सागर उनके चरण चढ़ा बैठीं

हुई सुबह जब पलके खुली मेरे...... मैंने खुद को भगवान् जी के चरणों तले ही पाई.....

जब देखी मैं बाहर का नजारा......

दुख के काले बादल छट सी गई थी

मैं खुशी से झूमते वापस उनके चरणों में जा बैठीं

आज लगा यूँ जैसे भगवान् जी ने मेरे लिए

ये दुनिया ही उलट कर दी हो......

आज लगा यूँ जैसे...... उनके चरणों तले

मुझे मेरा सारा संसार मिल गया हों

आज लगा यूँ जैसे.....सबसे ज्यादा खुश किस्मत मैं हूँ



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