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Varsha Divakar

Inspirational

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Varsha Divakar

Inspirational

मन व्याकुल.....

मन व्याकुल.....

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व्याकुल मन...... अब कोई दोस्त ढूँढता है 
सब तरफ से ताने ...अब मन किसी के पास सुकूँ ढूंढता है
ढूँढ रहे मुझमे लोग सुंदरता..... लेकिन
व्याकुल मन.. मुझमे खूबियां देखने वाला ढूँढता है
हुए बहुत लोगो से अपमानित... 
व्याकुल मन.... अब सम्मान देने वाला ढूँढता है... 
रखे बहुत माथे पे सजाके जमाने को... 
व्याकुल मन...... अब अपने सरआँखों पे सजाने वाला ढूँढता है...... 
मन बड़ा अधीर..... किसी से खुशी ढूँढता है..... 
थक गए समझाते सबको .... 
अब कोई समझने वाला ढूँढता है...... 
खुद के लिए लड़ते लड़ते थक गए... 
अब मन खुद के लिए लड़ने वाला ढूँढता है... 
व्याकुल मन..... अब कोई समझने वाला ढूँढता है 
ये दुनिया शांत सा..... पर उठ रहा मन में हीलोर
कर बैठते अब लोगो से तानेबाने... 
व्याकुल मन.... अब थोड़ी खुशियाँ ढूँढता है... 
दुनिया के चकाचौंध मे भागते भागते अब थक गए
व्याकुल मन..... अब शांत सा दुनिया ढूँढता है 
मन व्याकुल... अब ऐसा कोई जहां ढूँढता है...... 
        
   ✍️ वर्षा रानी दिवाकर 🥰




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