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Varsha Divakar

Classics

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Varsha Divakar

Classics

श्रृंगार.......

श्रृंगार.......

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कोई अपने मन की बात रखे थे मेरे सामने 
अपने हाथों मे कागज कलम ही रख लो 
टूटी फूटी सी कुछ कहानी या कविताएँ तुम्हारी  .... उस कोरे कागज पे सब लिख डालो....  उम्र का फेरा जब खत्म हो चलेगा..... तब तुम्हारी लिखी  मामूली सी कागजें..... एक पुस्तक का रूप ले पड़ेगी...... जब बैठोगी उसमे से  कुछ पन्ने पलटने.... सुबह से शाम हो जायेगी 🥰🥰🥰कुछ मीठी यादों को पढ़.. .. चेहरा तुम्हारा खिल उठेगा 🥰
अपने हाथों मे कलम और कागज का एक  श्रृंगार तो कर 

            ✍️ वर्षा रानी दिवाकर 🥰🥰🥰



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