कटाक्ष.....
कटाक्ष.....
असत्य पे मै सत्य की कटाक्ष प्रहार करती हूँ 🤍
मैं मौन रहकर... झूठों का कालर पकड़ती हूँ 😌
मैं बोलती नहीं जुबान से.... बस सुनती जाती हूँ....
तू जो बोल रहा है झूठ.... उसको बड़े प्यार से सुनती हूँ
तुझे लगता होगा मैं हूँ बड़ी पागल..... जो तेरी बातें बड़े गौर से सुनती हूँ 🤔
पर ये भूलना नहीं....... मैं भी हूँ एक इंसान
जितना तू सोच रहा... उससे कहीं ज्यादा मैं समझदार हूँ 🤗
मै शांत रह बस तेरा पागलपन भाँपति हूँ ☺
यूँ तो है बहुत नादानियां मुझमें
पर आये जहाँ झूठ की खुशबू. .......
खुद को कर तेरे नजरों में गलत.....
मै शांत सी रह जाती हूँ...... मै झूठे लोगो से कहीं दूर चली जाती हूँ........ 😇
लगे जहाँ मुझे अच्छा उन लोगों के बेहद करीब रहती हूँ
जहाँ हो कद्र मेरी..... उन लोगों के पास रह जाती हूँ....
✍️ वर्षा रानी दिवाकर🥰🥰🥰🥰
