Saini Nileshkumar
Inspirational
समय बनाता है इमारत कभी कभी तोड़ता है इमारत
हर लम्हे की परख कराता हर इंसान की परख कराता
और कहता है यह मैं ही हूँ सबसे बलवान
कभी अँधेरी रात तो कभी चुभती हुई धूप
सबसे बड़ा है ये जिसका नाम समय है
कामयाबी
तुम
मन
रिश्ते
स्वार्थ
इश्क़ मे ना ते...
ए ज़िन्दगी यूँ...
रख के हिम्मत
अजनबी सी सुबह
मन पापी
देवालय में बैठा बैठा मैं मन में करता ध्यान। शुभ दिन आया मैं करूँ दीप कौन सा दान। देवालय में बैठा बैठा मैं मन में करता ध्यान। शुभ दिन आया मैं करूँ दीप कौन सा द...
सफलता की एक ऐसी कहानी ये, जिसने बदला नज़रिया। सफलता की एक ऐसी कहानी ये, जिसने बदला नज़रिया।
अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी
हम सबकी सुनेंगे... लेकिन हमें कोई नहीं.... कोई नहीं सुन सकता। हम सबकी सुनेंगे... लेकिन हमें कोई नहीं.... कोई नहीं सुन सकता।
इंद्रधनुष देखकर मेरे मन में सदा, एक ही ख्याल आता है! इंद्रधनुष देखकर मेरे मन में सदा, एक ही ख्याल आता है!
पुकार ले कोई जो पीछे से, तो रुक जाएं ये कदम. पुकार ले कोई जो पीछे से, तो रुक जाएं ये कदम.
सांस ये जब तक बाकी है, सब कर्म रहूँ में यूँही करती। सांस ये जब तक बाकी है, सब कर्म रहूँ में यूँही करती।
पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में। पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में।
उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ही तो मेरी जागीर है।.... उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ह...
क्यों डरते है इस हार से हम , ये हार असल में जीना है। क्यों डरते है इस हार से हम , ये हार असल में जीना है।
पूत है कुल का गौरव तो, बेटी है संसार।।30 पूत है कुल का गौरव तो, बेटी है संसार।।30
वो राधा है वो गीता है वो शक्ति है वो सीता है. वो राधा है वो गीता है वो शक्ति है वो सीता है.
नारी इस जग की जननी है वन्दन उसको हम करते हैं।। नारी इस जग की जननी है वन्दन उसको हम करते हैं।।
हाँ हम भी होली मनाते हैं.. रिश्तों को रिश्तों से मिलाते हैं.. हाँ हम भी होली मनाते हैं.. रिश्तों को रिश्तों से मिलाते हैं..
पुनर्जन्म से पहले आत्मा करती है थोड़ा आराम! पुनर्जन्म से पहले आत्मा करती है थोड़ा आराम!
अहिल्याबाई का सुदृढ़ व्यक्तित्व, उनकी जीवन गाथा। अहिल्याबाई का सुदृढ़ व्यक्तित्व, उनकी जीवन गाथा।
बैर और नफरत की दीवार को, मिलकर मिटटी में मिलाते हैं चलो इस जनवरी, जन जन को जगाते हैं. बैर और नफरत की दीवार को, मिलकर मिटटी में मिलाते हैं चलो इस जनवरी, जन जन को...
ये सूना पड़ा हुआ घर, घर का खाली पड़ा अहाता। ये सूना पड़ा हुआ घर, घर का खाली पड़ा अहाता।
नमन तुम्हे है हे! माता, मै शत शत बार प्रणाम करूॅ॑। शब्द नहीं मेरे मन मंदिर में। नमन तुम्हे है हे! माता, मै शत शत बार प्रणाम करूॅ॑। शब्द नहीं मेरे मन मंदिर मे...
रेत के समान है वक्त बंद मुट्ठी से भी फिसल जाता है, जो वक्त के साथ चले वक्त उसी के साथ। रेत के समान है वक्त बंद मुट्ठी से भी फिसल जाता है, जो वक्त के साथ चले वक्त उस...