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Sandeep Kumar

Abstract

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Sandeep Kumar

Abstract

समय नहीं है आज किसी के पास

समय नहीं है आज किसी के पास

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बड़ी मुश्किल से जीवन चलते हैं

दोस्त भी दोस्त से कम मिलते हैं

किससे कहेगा दिल से दिल का राज

समय नहीं है आज किसी के पास


भागदौड़ की जिंदगी खा रही है मात

सुबह से शाम तक हो रही है का बात

समझ में नहीं आ रहा है मेरे प्रिय बंधु

किससे करूं मैं दिल से दिल का बात

समय नहीं है आज किसी के पास


समय-समय पर मिलते नहीं सजेशन

राह कठिन और ऐसेवैसे होते जीवन

खिलते नहीं जीवन में कोई भी मधुवन

कैसे चलते हैं ऐ माधव तेरे तपोवन

किससे कहेगा दिल से दिल का बात

समय नहीं है आज किसी के पास



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