समुद्र की लहरों सा
समुद्र की लहरों सा
समुद्र की लहरों सा जिंदगी का सफर
कभी निर्मल स्थिर, तो कभी बहता निरंतर,
कभी डराता हुआ आगोश में लेता सबको
कभी मन को छू जाता मधुर स्पर्श बन कर
कितना तीव्र डरावना फिर भी अच्छा लगता सबको
इसे बस में करने की कोशिश करता इंसान इसी पे चढ़ कर
समुद्र की लहरों सा ज़िन्दगी का सफर
कभी किनारों को बहाता, कभी दूर से आता झर झर...झर झर
काश में भी बह पता लहरों की तरह
निरंतर, निसंकोच, निश्चल, निर्मल, कोमल, हर पल, हर पल।
