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Abhishu sharma

Inspirational

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Abhishu sharma

Inspirational

समर्थ

समर्थ

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ये दकियानूसी मानसिकताएं , ये अदृश्य-से पिंजरे ,

ये मुरझाये गुलशन में कांटों भरे रास्ते

अगर इतनी ही कठिन है डगर जीवन की , तो

 क्या ये तंग ज़िन्दगी जीना ज़रूरी है? 

यह बिच्छू सा सवाल उसके लबों पर जब आया 

उसकी आवाज़ को डांक मार , काट गया उसकी जबान

आज एक और नदी का खिलखिलाता कलरव ,

अहंकारी समुन्दर के तूफ़ान में कहीं खो गया 

आखरी अपने शब्दों को हकलाते बस वो इतना ही कह पायी

टिके रहना , डटे रहना की वक़्त के साथ सब सही हो जाता है 

की समय हर मर्ज़ की बस ये एक ही दवा है

जीती खुशियां ,जाते गम ही जीवन की आबो-हवा है। 



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