STORYMIRROR

Saumya Singh

Inspirational Others

3  

Saumya Singh

Inspirational Others

समाज की संकीर्ण सोच

समाज की संकीर्ण सोच

1 min
12.3K

यही समाज पहले कहता है

उमर से कच्ची है तू

प्रेम कैसे करेगी

अभी तो बच्ची है तू


लेकिन बाद में 

अगर रिश्ते ना संभाल पायी 

तो अच्छी नहीं है तू

स्री धर्म नहीं निभा पायी

तो सच्ची नहीं है तू

घर का मान ना रख पायी

तो नीच इंसान है तू

दूसरों के लिए त्याग

ना कर पायी

तो समाज के लिए

बस एक दाग़ है तू


ये वही समाज है जिसके बारे में

तू कितना सोचती है

लेकिन अफ़सोस ये

तेरे बारे में कुछ

अच्छा नहीं सोचता

इसलिए तू छोड़

इस समाज को

मोड़ अपनी राह को 

उड़ के जा आकाश ओर

और अपनी भी एक छाप छोड़! 

  

       

            


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational