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Arun Gode

Abstract

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Arun Gode

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सिंधुमाई सपकाल

सिंधुमाई सपकाल

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चरवाहा के घर में आया अनिष्ट अपत्य,

रखा बालिका का नाम परिवार ने चिन्धी। 

अनाथों की माता सिंधुमाई की कथा, 

अनाथों का दर्द वही माई की व्यथा। 


माई को था शिक्षा का गहरा आकर्षण, 

चरवाहा काम बना शिक्षा में व्यवधान। 

करती थी वह समय का सही नियोजन, 

चौथी कक्षा तक किया सफल अध्ययन। 


वर्धा,पिपरी-मेघे में बितायां था बचपन, 

उम्र बाराह में माई का विवाह संपन्न। 

ससुराल का मौसम भी महके के समान, 

सहना पड़ा पल –पल वही हमेशा अपमान। 


बड़े हिम्मत से जी रही थी वह जीवन, 

अधेड़ पति से माई का हो रहा उत्पीड़न।  

तीन संतानों का माई के कोखसे आगमन,

फिर भी नहीं मिला परिवार में उसे सम्मान। 

  

घोर संघर्षमय रहा माई का पूरा जीवन, 

गोबर बोली में छेड़ा था प्रथम अभियान। 

स्थानीय सावकार का हुआ आर्थीक नुकसान, 

षडयंत्रकारी सावकारने छेड़ा अभ्रद्र अभियान।  


स्वार्थी सावकारने लगायां माई पर लांछन, 

माई के पेट में पल रही हैं उसकी संतान। 

पति के धैर्य का छूटा था अंहकारी बाण, 

गर्भवती माई का का ससुराल से निष्कासन। 


क्रांतिकारी माई का छूटा हिम्मत का बाण, 

आत्महत्या करके दे रही थी वह अपने प्राण। 

सजग विवेक बुधदीने जगायां उसका स्वाभिमान, 

माई के कोख से अवांछित कन्या का आगमन।  


चौरासी आदिवासी गावों का होना था पुनर्वासन,

सही मूल्याकन के लिए माईने छेड़ा अभियान। 

वही से माई के नेतृत्व क्षमता की बनी पहचान, 

अनाथों के लिए कुंभारवलन में ममता बाल सदन। 


हजारों अनाथ बच्चों का किया पालन –पोषण,

उन्हे शिक्षा देकर समाज में दिलायां सम्मान। 

अनाथ अनुरूप जोड़ों का कराके विवाहमिलन, 

सुखमय बनायां अनाथों का सांसारिक जीवन। 


अनाथों के लिए बनायां मदर ग्लोबल फाउंडेशन,  

ताकी दुनिया भरसे मिले अनाथों को आर्थीकदान। 

सामाजिक कार्यकर्ता ,समाजसेवी की बनी थी पहचान, 

मदर टेरेसा, नारि शक्ति,पदमश्री पुरस्कारों से सम्मान।

 

यथार्थ संस्कारों का रहा था सिंधुमाई में निरंतर जुनून, 

महिलाएं व युवतीयां करे जीवित रूढ़ीयों का नित्य जतन।  

अपनी विरासत को संभालने का करती थी हमेशा प्रबोधन,

भारतीय संस्कृति का सुखी-संसार में बताती भरीव योगदान।  


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