STORYMIRROR

aazam nayyar

Abstract Tragedy Inspirational

4  

aazam nayyar

Abstract Tragedy Inspirational

सिलसिले यादों के

सिलसिले यादों के

1 min
382

ग़ज़ल


दिल में उसको यादों का सिलसिला है!

जिदगी से हो गया जो लापता है  


गैर रक्खा है उसी ने खुद को मुझसे

 रक्खा उसने कब मगर ये वास्ता है


नफ़रतों ने घेरा है ऐसा मुझे 

प्यार का खोया यहां तो रास्ता है 


कब बढ़ाएगा क़दम वो दोस्ती का

मेरा उससे तो अभी तक फ़ासला है


देखकर इनकार कर देता है रिश्ता 

शक्ल से क्या वो यारों इतना बुरा है


देखता था आंखों में जिसकी वफ़ा 

फेरकर चेहरा वही मुझसे चला है 


बोलता वो बात कोई भी नहीं तो 

आंख भरके वो आज़म को देखता है।

आज़म नैय्यर 

सहारनपुर उत्तर प्रदेश 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract