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Sudhir Kumar

Fantasy

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Sudhir Kumar

Fantasy

सीने में खंजर लेकर ,रिंद घूमते देखे हैं

सीने में खंजर लेकर ,रिंद घूमते देखे हैं

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सीने में खंजर लेकर, रिंद घूमते देखे हैं।

मयखाने में अपने नशे में झूमते देखे हैं।


कभी न निकली दर्द की आह दिल से,

नशे ए ग़म के अहसास को भूलते देखे हैं।


घूमते घूमते गुम जाते हैं अपने ही शहर में,

सैरगाहों में वो अजनबी से घूमते देखे हैं।


जमाना रास ना आया सच्चे आशिकों को,

जिंदगी और मौत के बीच जूझते देखे हैं।


लोग अपना घर फूंक तमाशा देखते हैं सुधीर,

रिंद अपना ज़िगर मयखाने में फूंकते देखे हैं।


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