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Bharat Jain

Abstract

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Bharat Jain

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सीधी सीधी सड़क नहीं है

सीधी सीधी सड़क नहीं है

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खो जाने में आसानी है,

मिल जाने पर मुश्किल होगी,

वीरानों में आंख खुली है,

ये न अभी सजल होगी।


सीधी सीधी सड़क नहीं है,

तुम तक कितने मोड़ पड़े हैं,

आधी राह गुजारी अब तक,

आधी और विरल होगी।



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