STORYMIRROR

Neelendra Shukla

Classics Inspirational

3  

Neelendra Shukla

Classics Inspirational

श्वेत - वर्ण

श्वेत - वर्ण

1 min
266

मुझे मालूम है तुम्हारा वर्ण - श्वेत नहीं है, 

ना ही तुम मेरी माँ हो, 


मुझे मालूम है एक प्रेमिका और माँ का रिश्ता !

पर सच तो यही है कि मैं तुम्हें ठीक 

उसी तरह स्वीकारता हूँ, 

उतना ही प्रेम करता हूँ, 


जैसे लोग स्वीकारते हैं अपनी माँ को 

बिना किसी नुक्ताचीनी के,


मुझे स्त्रियों का वर्ण नहीं दिखता,

मैं उनके वात्सल्य, मातृत्व और 

प्रेम से अभिभूत रहता हूँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics