STORYMIRROR

Mukesh MAC

Classics

4  

Mukesh MAC

Classics

मगर शायद

मगर शायद

1 min
616

खत्म होने को है सफर शायद

फिर मिलेंगे कभी ,मगर शायद....

लिख के रख लिये हैं अपने एहसास


कह देंगे तुमसे भी कभी मगर शायद

वो मुझे पसंद हैं मैं उसे कह भी दूँ 

मै भी उसे पसंद हूँ वो भी हाँ ही कहे शायद.....मगर शायद मैं


गुजर जाना चाहता हूँ गुजरे जमाने से

मैं गुजर भी जाऊंगा... मगर शायद

मैं मजबूर हूँ जो इजहार कर न सकूँगा 


मै अपने असुलो को दरकिनार कर न सकूँगा 

हो सकता है तुम्हें मेरी मजबूरी हो मालूम.....मगर शायद।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics