STORYMIRROR

सीमा शर्मा सृजिता

Inspirational Others

4  

सीमा शर्मा सृजिता

Inspirational Others

शुभ स्वागतम

शुभ स्वागतम

1 min
589


दरवाजे पर तोरण सजाया है 

दहलीज पर रंगों से बनाया है 

सुन्दर डिजाइन वाला फूल 

मुसीबतों ! तुम चली आओ 

तुम्हारा स्वागतम, शुभ स्वागत।


अरे ! तुम तो हैरान हो गई 

मेरे चेहरे की मुस्कराहट देख 

सोच रही हो ना मैं परेशां क्यों नहीं

तुम्हारे आने की आहट देख 


तुम्हें नहीं पता क्या? मैं वो सोना हूं 

जितना तपाओगी उतना ही चमकूंगी 

तुम जानती नहीं क्या? मैं वो खुशबु हूं 

कितना भी छुपाओगी फिर भी महकूंगी 


मेरे घर के कोने में भी चली आना 

एक झलक देख जाना मेरे ठाकुर की 

वंशी बजाकर मन्द मन्द मुस्कराता है,

मोर - मुकुट पहने वो छलिया इतराता है।


वो साथी -सखा मेरा सब कुछ है 

जब वो साथ है मेरे, तो क्या तू है?

चली आओ! मैं डरने नहीं वाली

मेरे संग खड़ा है मेरा बनवारी।


जिस माटी से मुझको बनाया गया  

तुम जैसों से लड़ना सिखाया गया 

मेरी हिम्मत को देना न चेतावनी 

मैं क्या हूं तुम मुझको न पहचानती।


हारना मैंने सीखा नहीं है कभी 

मैं लड़ती रहूंगी जब तक जिंदगी

तुम्हारे माथे पे क्यों ये पसीने की बूंदें ?

इधर -उधर देखें, जाने क्या ढूँढें? 


तुम आकर जब भी चली जाओगी

खुशियों से हमको मिलवाओगी 

वो सुखद लम्हे, तुम्हीं लाओगी

मुस्कराहटें मेरे घर में बिखराओगी।


इसलिये तो 

सुनो! मुसीबतों! 

तुम चली आओ 

हां! बेझिझक चली आओ 

तुम्हारा स्वागतम, शुभ स्वागतम।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational