STORYMIRROR

Sangeeta Aggarwal

Tragedy

4  

Sangeeta Aggarwal

Tragedy

शर्म करो

शर्म करो

1 min
512

कौन हैं इस देश के गद्दार

कौन हैं जिन्हें नहीं देश से प्यार

मौत पर जो ठहाके लगाते हैं

आपदा में अवसर जो निकालते हैं


देश घिरा मुश्किल हालात में

ये सिर्फ जलती लाशों पर 

रोटियां सेकना जानते है

शर्म करो कुछ मौत के दलालों


खुद पर कुछ प्रश्न उठा लो

मौत किसी की कहां सगी होती है

ये जब आती चुपके से आती है

चार पैसे के लिए आज

तुम मानवता अपनी खोते हो


सोचो ऐ नादानो तुम 

ऐसे कितने पाप ढोते हो

मेहनत की कमाई से लोग

बचा नहीं पा रहे अपनों को


तुम इस पाप की कमाई पर 

ऐसे क्यों इतराते हो

मानवता की सेवा भले ना करो

पर लाशों से पैसे कमाना बन्द करो

वरना एक दिन तुम पछताओगे

पाप की कमाई से कैसे

अपने अपनों के लिए  

कैसे खुशियां तुम ला पाओगे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy