Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".
Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".

Ajay Singla

Classics


5  

Ajay Singla

Classics


श्रीमद्भागवत-२४०;कुवलीयापीड का उद्धार और अखाड़े में प्रवेश

श्रीमद्भागवत-२४०;कुवलीयापीड का उद्धार और अखाड़े में प्रवेश

2 mins 323 2 mins 323


श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित 

रंगभूमि में नगाड़े जब बज रहे 

कृष्ण बलराम दंगल को देखने 

रंगभूमि की और चल दिए ।


रंगभूमि के दरवाज़े पर

कुवलीयापीड हाथी खड़ा देखा 

‘ हट जाओ, हमें रास्ता दे दो ‘ 

ललकार कर महावत को ये कहा ।


महावत क्रोध में तिलमिला उठा 

उसने भयंकर उस कुवलीयापीड को 

क्रुद्ध करके अंकुश की मार से 

बढ़ा दिया कृष्ण की और को ।


कृष्ण को सूँड़ में लपेटा हाथी ने 

कृष्ण निकल गए, घूँसा मारा उसे 

उसे घसीटने और घुमाने लगे 

पूँछ पकड़कर खेल खेल में ।


क्रोध में जल भून रहा वो 

भगवान कृष्ण पर झपट पड़ा 

सूँड़ पकड़कर उसकी कृष्ण ने 

धरती पर उसे पटक दिया ।


पैरों से दबाकर उसको 

उखाड़ लिए उसके दांत थे 

उन्ही से हाथी और महावतों को 

मार दिया अपने हाथों से ।


हाथ में दांत लेकर हाथी के 

कृष्ण प्रवेश करें रंगभूमि में 

कंधे पर वो दांत रखा है 

शरीर पर थीं रक्त की बूँदें ।


मुखकमल पर पसीने की बूँदें 

शोभा उनकी थी निराली 

दर्शन किए पुरवासीयों ने उनके 

अपने अपने भावनुसार ही ।


वैसे तो कंस बड़ा वीर था 

फिर भी जब उसने देखा ये 

कि कुवलीयापीड को मार दिया दोनों ने 

सोचे वो कैसे जीतूँगा इन्हें ।


उनका सौंदर्य, गुण, माधुर्य देख 

स्मरण कर लीलाओं का उनकी 

सोचे कि नारायण के अंश हैं 

कृष्ण और बलराम दोनो ही ।


वासुदेव के घर अवतीर्ण हुए 

कृष्ण हुए देवकी के गर्भ से 

बहुत दिनों तक नन्दबाबा के 

घर में छिपकर रहे वे ।


कई दैत्यों का वध किया इन्होंने 

गोपों को दावानल से बचाया 

कालियनाग का दमन किया 

गोवर्धन पर्वत था उठाया ।


यदुवंश की ये रक्षा करेंगे 

और जो बलराम जी हैं ये 

प्रालंबासुर, वत्सासुर और 

बकासुर को मारा इन्होंने ।


उसी समय रंगभूमि में 

चाणूर ने दोनों से कहा 

वीर तुम आदरणीय हो 

कुश्ती लड़ने को तैयार हो ना ।


तुम्हारा कौशल देखने के लिए 

यहाँ बुलाया महाराज ने तुमको 

अब तुम दोनो कुश्ती लड़ोगे 

प्रसन्न करने के लिए उनको ।


श्री कृष्ण तो चाहते ही थे 

कि इनसे दो दो हाथ करें 

कहें चाणूर, हम अवश्य ही 

ऐसा प्रयत्न करना चाहेंगे ।


किन्तु चाणूर, हम तो अभी बालक

कुश्ती लड़ेंगे हम बालकों से ही 

चाणूर कहे, तुम ना बालक ना किशोर हो 

श्रेष्ठ हो हम बलवानों से भी ।


हज़ार हाथियों का बल रखने वाले 

कुवलीयापीड को मारा खेल खेल में 

इसलिए तुम्हें हम जैसे ही 

बलवानों से लड़ना चाहिए ।


इसमें अन्याय की कोई बात नहीं 

तुम मुझपर ज़ोर आज़माओ

मुष्टिक कुश्ती लड़ेगा इनसे 

तुम्हारे भाई बलराम जी हैं जो ।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Ajay Singla

Similar hindi poem from Classics