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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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राम ही सर्वस्व है

राम ही सर्वस्व है

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राम ही धर्म, राम ही कर्म, राम ही सर्वस्व है।

 सद्भावों का दीप जलाएं राम की सौगंध है।


 सम्यक दृष्टि, मर्यादा, रामचरित्र शिरोधार्य है।

 जीवन में पग-पग पर राम ही अनिवार्य है।


 राम नाम का जाप जपे, राम ही स्वीकार्य है।

 राम में आस्था, राम की करुणा, राम का सौहार्द्र है।


परीक्षा है धैर्य की, सद्भाव की, कर्तव्य की।

 रोम-रोम में राम बसे हैं, सनातनी सत्कर्म की।


दिव्यता की दृष्टि देकर सृष्टि का उद्धार किया।

समता का भाव जगाकर परमार्थ पथ प्रशस्त किया।


करुणा का भाव भरे, सहज जीवन उद्धार करे।

सनातनी मार्ग दिखाकर पल-पल आल्हादित करे।


उच्च आदर्शों के नायक, यश कीर्ति का संज्ञान दिया।  

मर्यादा में रहकर, अध्यात्म का विस्तार किया।


रखी संवेदना जन-जन से, कर्तव्य का विस्तार किया।

कलयुग को भी त्रेता के शुभ संकेतों से ढाँक लिया।


धर्म, न्याय, सद्भाव से सम्यक दृष्टि  सिखलाई।

 सौजन्य, समन्वय, सौम्यता की अनुपम झाँकी दिखलाई।


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