शिव नटराज़
शिव नटराज़
काली जटा जुट के बीच गंगा की धार
भोले बाबा ने यह कैसा किया श्रृंगार !
शंकर जी ने ज़ब पिया गरल का प्याला
नीलकंठ कहलाए तबसे किरीट कृपाला !
कैलाश पर्वत पर करते तपस्या मन मगन
उनके त्रिनेत्र की शक्ति करे दुष्टों का दहन !
गौरा सदा शोभती शिव की बामांगी बनकर
पीकर भंग अपने टोली संग नाचे शिव औघड़ !
