शिक्षक
शिक्षक
सदा पिरोता मणियाँ,
भविष्य हमारा बनाने को।
मणियों का दर बना,
भविष्य हमारे लिए ।।
वह शिक्षक ही गुरु,
अंधकार में जो दीप जलाए,
एक कुम्हार सा पल पल,
दक्षता जीवन में लाये।।
गुरु तत्त्व शिक्षक में,
युगों युगों से समाया है,
कभी माँ रूप में, कभी गुरु में,
शिक्षक सदा ही प्रिय हैं।
करूँ वंदन, मन से,
आज गुरुओं के श्री चरणों में,
शिक्षा, ज्ञान के धन है जो,
विराजे जो धरा के अंक में।।
