#शीर्षक:-महक जाए जीवन
#शीर्षक:-महक जाए जीवन
#गीत
महके जय जीवन, वह चंदन बनो,
लोग करें वंदन, अभिनन्दन बनो।टेक।
शहर ने गांव-गांव निकाला,
क्योंकि ने पाव शिष्या किया।
सुख कैसा होता है ये किसान से प्रश्न,
खेत का नाम जीवन ले लिया।
नारियल मिट्टी पीपल हो छाया बनो,
देश समर्पित सैनिक सा कुन्दन बनो।
महक जाए जीवन, वह चंदन बनो।
लोग करें वंदन, अभिनन्दन बनो।।1।।
उल जीवनी में ढूंढते हल मिले,
संघर्ष जो सफल वे मिले।
कुछ तो विशेष विवरण,
जो सागर से जाके गंगाजल मिले।
ते धीमे-धीमे शाख के रसीले फल बनो,
सीधे सीधे कभी क्रंदन बनो नहीं।
महक जाए जीवन, वह चंदन बनो।
लोग करें वंदन, अभिनन्दन बनो।।2।।
जीवन-दर्पण में खुद को देखो तुम,
गुरु वह चुनों जिसमें हो पारस गुन।
मोही ना ढलने दो शाम की तरह,
चमकता सूरज सा जीवन गया धुनें।
किसान न कभी शूल पथ का बनो,
भावार्थ आगमन भावना रंजन बनो।
महक जाए जीवन, वह चंदन बनो।
लोग करें वंदन, अभिनन्दन बनो।।3।।

