शहादत
शहादत
नमन उन शहीदों को जिन्होंने देश
पर जान अपनी कर दी कुर्बान
नमन उस मां को जिसने
देश पर अपनी कोख दी वार
नमन उस बेवा को जिसने अपना
हार-सिंगार दिया देश के लिए वार
नमन उस बहना को जिसने राखी वाली
कलाई दी भारत माता को संभाल।
किस किस को करूं मैं नमन मेरे देश
पर लाखों करोड़ों सिपाही करते हैं
अपनी जाने कुर्बान नहीं ऐसों की
कोई भी मिसाल नहीं मैं कर्ज चुका सकता
उनका जो देश-प्रेम पथ पर चलते हुए
देश की आन-बान-शान के लिए करते
हैं खुद को कुर्बान क्या मिसाल दें
उन जवानों के हौंसलों की
जो सरहद पर डटे खड़े दिन -रात।
ना भाषा-वाद ना जात-पात का
भेदभाव उनमें हर मुसीबत का डट कर करें
मुकाबला एक-दूजे को देते हौसला
चाहे बस यही खून की नदियां
हम सुरक्षित हैं चैन-ओ-अमन में है
तो ये है उन जवानों की करामात।
नहीं करता कोई परवाह बीवी-बच्चों की
ना ही चिंता किसी को बुढे
मां - बाप की बस भारत-माता से जोड़ा रिश्ता
तो सब से निभ गया रिश्ता।
हंसते-हंसते हो जाते शहीद मां की खातिर
नमन उनकी शहादत को
नमन ऐसे वीरों को
जिसने ऐसा सपूत जना नमन उस मां को।
