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Sangeeta Ashok Kothari

Inspirational

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Sangeeta Ashok Kothari

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शबरी के बेर :सुदामा के तंदुल

शबरी के बेर :सुदामा के तंदुल

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जमीं से जुड़ोगे तो नभ भी झुक जायेगा,

वरना अहम के बोझ तले इंसां दब जायेगा

निस्वार्थ ध्याओं प्रभु को उन्हें भी पा लेगा,

मन में कपट रखोगे तो तू मुँह की खायेगा।


हर बेर चखा वो भक्तिभाव शबरी का था,

बड़प्पन प्रभु का छिपे भाव समझ खाया,

राहें सुगम नहीं ज़िन्दगी हैं आग का दरिया

एक प्रभु के भरोसे पर जी रहे मानव यहाँ।


सुख में साथ, मतलब नहीं होता दोस्ती का

बाँट लें ग़म यार का वो सच्चा दोस्त होता,

सुदामा की भेंट तंदुल को स्वीकार किया,

ऐसे कान्हा ने दोस्ती को अमर कर दिया।


यदि रामजी कहकर ठुकराते बेरों को झूठा

या,क्या चावल के दाने लाये कहते कान्हा,

तो पौराणिक इतिहास से हम सीखते क्या

ये दृष्टांत ही मानव को सही मार्ग दिखाता।



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