शब्द
शब्द
बहुत बदल गए हैं, अर्थ,
उन शब्दों के,
जो सीखें थे बचपन में।
तब उन शब्दों के अर्थ भी,
सिर्फ शब्द होते थे।
शब्दों के इस अर्थ को जानो,
सच्चे साथी, सदा-संग,
जैसे डोर-पंतग संग हैं।
नहीं होंगे हम -तुम से,
कभी अलग,
चाहे झपकेगी तुम्हारी पलक।
सदा तुम्हारी परछाई बन जाऊं,
बस यहीं है लालसा मेरी,
बहुत बदल गए हैं, अर्थ,
उन शब्दों के,
जो सीखे थे बचपन में,
तब उन शब्दों के अर्थ भी,
सिर्फ शब्दों ही होते थे....!
