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Gayatri Yadav

Fantasy

4.2  

Gayatri Yadav

Fantasy

शायद मैं अब वो नहीं हूं......

शायद मैं अब वो नहीं हूं......

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मुझे इस बात का इल्म है की तू मेरा नहीं है, ये मैं जानती हूं, पर इस दिल को कौन समझाए, ये नदिया, ये हवाएं,ये फिजाएं सब अपनी रवानी में हैं, पर इनमें अब वो बात नहीं है। ये चिड़ियों का चहचहाना,जो  उकेरता था मन में तेरी प्रेमसंगीत की धुनों को,ये बारिशों की बूंदे की जो मन को तेरी यादों से गुदगुदाती थी, तू ले गया सब अपने साथ, तेरे साथ न होने से इनमें अब वो बात नहीं है । मेरे साथ चले हुए तेरे कदमों आहट को महसूस करने की बेकरारी की तलब रहती है, ये बातें तुम्हें मै कभी नहीं समझा पाई, मेरा वो तेरे साथ हंसना, तेरी वो शरारत भरी बातें करना, तेरी वो मस्ती से भरी अटखेलियां, सब कुछ तो है मेरे पास मेरी यादों में, अगर कुछ नहीं है मेरे पास तो शायद मैं, जो मैं थी शायद वो कहीं खो सी गई है, हंसती हूं मैं अभी भी , गुनगुनाती हूं मैं अभी भी पर इनमें अब वो राग नहीं है......


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