धारा
धारा
सरिता की धारा सी बहना है मुझको, अविरल गति से चलना है मुझको,
सरिता की धारा सी बहना है मुझको।
पर्वत जैसी हर बुलंदी को छूना है मुझको, सरिता की धारा सी बहना है मुझको।
है बड़ा ही दिव्य उगते सूरज का रंग , बस इस रंग के जैसे खिलना है मुझको,
सरिता की धारा सी बहना है मुझको।
हर कदम पर जहां की बेड़ियां बांधती है मुझको, सबसे परे इक जहां बनाना है मुझको,
सरिता की धारा सी बहना है मुझको
