लक्ष्य
लक्ष्य
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मुझको अपनी गीत सिखा दो, उड़ने की ये रीत सिखा दो।
पंख पसारे उड़ू आसमां में, सूरज का ये तेज हो जितना ,
उसी वेग से बढूं लक्ष्य पर, मुझको अपनी गीत सिखा दो,
उड़ने की ये रीत सिखा दो।
जितने ऊंचे आसमान में , तुमने बसाए अपने जहां है,
उतना ऊंचा, उतना ही विस्तृत मैंने सुझाया अपना लक्ष्य है,
मुझको भी मेरे लक्ष्य पर उड़ना सिख ला दो, मुझको अपनी गीत सिखा दो,
उड़ने की ये रीत सिखा दो।
