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दयाल शरण

Inspirational

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दयाल शरण

Inspirational

शास्वत

शास्वत

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आज से इस जीवन में

द्वार नया खुल गया।

अतरंगी कलरव को

नव आलय मिल गया।


केतकी, गुलाब, जूही

एक सूत्र निध गए।

आलय के द्वार पर

स्वागतध्वज चढ़ गया।


कदम-कदम चलने से

क्षितिज छू के आने तक।

मृदुल- सख्त अनुभव का

ताना-बाना बन गया।


जीवन की धूप-छांव

अंजुरी में सिमट गई।

शास्वत हर लम्हों को

पृष्ठ नया मिल गया।


सुजला हो, सुफला हो

साथियों की डगर-मगर,

कहीं हो जरूरत तो

नाम मेरा जुड़ गया।


बदलेगी दिनचर्या

बदलेगी सुबह-शाम।

मंदिर की देहरी को

इक भक्त नया मिल गया।


जीवन की हाला में

स्वांसों की माला का।

जब तक भी हो प्रवाह

नव मुक्तक मिल गया।


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