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Rahulkumar Chaudhary

Romance Tragedy Classics

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Rahulkumar Chaudhary

Romance Tragedy Classics

सहारा प्यार के

सहारा प्यार के

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दश्त-ओ- सहरा में कभी उजड़े सफ़र में रहना

उम्र भर कोई न चाहेगा सफ़र में रहना


ऐ ख़ुदा फूल-से बच्चों की हिफ़ाज़त करना

मुफ़लिसी चाह रही है मेरे घर में रहना


इस लिये बैठी हैं दहलीज़ पे मेरी बहनें

फल नहीं चाहते ता-उम्र शजर में रहना


मुद्दतों बाद कोई शख़्स है आने वाला

ऐ मेरे आँसुओ, तुम दीद-ए-तर में रहना


किसको ये फ़िक्र कि हालात कहाँ आ पहुँचे

लोग तो चाहते हैं सिर्फ़ ख़बर में रहना


मौत लगती है मुझे अपने मकाँ की मानिंद

ज़िंदगी जैसे किसी और के घर में रहना।


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