शांत मन की यात्रा
शांत मन की यात्रा
मन में उठी लहर
वो भी शांत सी...
लहरों से थी मेरी दोस्ती
वो भी शांत सी...
दोस्ती बनी मोहब्बत
वो भी शांत सी...
मोहब्बत बनी इबादत
वो भी शांत सी...
इबादत बनी हकीकत
वो भी शांत सी...
हकीकत बनी अमानत
वो भी शांत सी...
अमानत बनी मुसिबत
वो भी शांत सी...
मुसिबत बनी कयामत
वो भी शांत सी...
कयामत बनी कायनात
वो भी शांत सी...
कायनात बनी दीवानियत
वो भी शांत सी...
दीवानियत बनी इंसानियत
वो भी शांत सी...
इंसानियत बनी जरूरत
वो भी शांत सी...
जरूरत पड़ी फिर मन की
वो भी शांत सी...
पर मन तो होता चंचल
फिर उठी लहर मन में
पर वो ना हुई शांत मुझसे।
सोनी रावत
