सफ़र उनके नाम
सफ़र उनके नाम
मंज़िल मुश्किल थी पर होंसला कमजोर नहीं,
दिल टूट कर बिखरा था पर ज़िंदगी हारी नहीं।
उम्मीद न थी पर खुद से भरोसा टूटा नहीं,
गम की रात थी पर खुशियों का सवेरा छूटा नहीं।
कहते हैं सफ़र अगर मुश्किल हो,
और उन रास्तों पर चलना नामुमकिन हो,
तो खुदा की इबादत से रास्ते आसान हो जाते हैं,
और सफ़र खुशनुमा, अगर हमसफ़र साथ हों।
तो कुछ अल्फाज़ उनके नाम जिनके,
बिना मेरी ये कहानी पूरी नहीं।
उनका अंदाज़ ही कुछ ख़ास था,
के तारीफ़ के लिए लफ़्ज़ भी कम पड़ गए,
उनकी मौजूदगी ही बस काफ़ी थी,
के उनसे मिलने के लिए ज़माने से लड़ गए।

