STORYMIRROR

Shaheen Iqbal

Classics Inspirational

4  

Shaheen Iqbal

Classics Inspirational

ख्वाहिश ज़िन्दगी की

ख्वाहिश ज़िन्दगी की

1 min
301

कुछ ग़लती हमने की 

कुछ ग़लती ज़माने ने की 

ज़िन्दगी ने फिर भी हमारी सिफारिश की।


गुज़रा वक़्त हमारा नहीं 

आने वाले कल की खबर नहीं 

लेकिन आज जीने की हमने गुज़ारिश की। 


कोरे पन्नों को सिर्फ भरना नहीं 

दो कदम चल कर रुकना नहीं

फिर से मंज़िल पाने की हमने ख्वाहिश की।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics