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Shaheen Iqbal

Romance Classics

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Shaheen Iqbal

Romance Classics

तेरे जाने के बाद

तेरे जाने के बाद

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क्यूँ हर वक़्त तेरी फ़िक्र है

क्यूँ ज़ुबां पर तेरा ज़िक्र है

मेरे दिल को बस एक ही सवाल है

भीड़ हो या तन्हायी , क्यूँ तेरा ही ख्याल है।


केहना तुझको चाहूँ मैं कीतनी बातें.

सोचना तुझको चाहूँ मैं कीतनी रातें

तन्हाइयों से अब थक चूका है मेरा दिल

तेरे आने की राह देखे मेरी नज़रें।


बिखर गया है दिल ये मेरा

कतरा कतरा इसे जोड़ दे

अक्स जो मेरा मुझसे बिछड़ गया

धीरे धीरे मुझे उस्से जोड़ दे।



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