STORYMIRROR

Shaheen Iqbal

Romance Classics

4  

Shaheen Iqbal

Romance Classics

तेरे जाने के बाद

तेरे जाने के बाद

1 min
353

क्यूँ हर वक़्त तेरी फ़िक्र है

क्यूँ ज़ुबां पर तेरा ज़िक्र है

मेरे दिल को बस एक ही सवाल है

भीड़ हो या तन्हायी , क्यूँ तेरा ही ख्याल है।


केहना तुझको चाहूँ मैं कीतनी बातें.

सोचना तुझको चाहूँ मैं कीतनी रातें

तन्हाइयों से अब थक चूका है मेरा दिल

तेरे आने की राह देखे मेरी नज़रें।


बिखर गया है दिल ये मेरा

कतरा कतरा इसे जोड़ दे

अक्स जो मेरा मुझसे बिछड़ गया

धीरे धीरे मुझे उस्से जोड़ दे।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance