STORYMIRROR

Shaheen Iqbal

Romance

3  

Shaheen Iqbal

Romance

तेरी यादें ख़ास हैं

तेरी यादें ख़ास हैं

1 min
166

मेरे इश्क़ की आग को बुझा दे वो समंदर है तू

मेरे रात के अँधेरे को रोशन कर दे वो सुबह है तू,

हर सुबह तेरा ज़िक्र है

हर रात तेरी फ़िक्र है।


ये सिलसिला तुझसे शुरू पर ना जाने क्यों मुझपे खत्म है

तू मुझसे दूर है मगर फिर भी मेरे पास है,

जो वक़्त बीत गया वो आएगा नहीं

मगर फिर भी वो मेरे लिए ख़ास है।

 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance