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Shaheen Iqbal

Romance

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Shaheen Iqbal

Romance

तेरी यादें ख़ास हैं

तेरी यादें ख़ास हैं

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मेरे इश्क़ की आग को बुझा दे वो समंदर है तू

मेरे रात के अँधेरे को रोशन कर दे वो सुबह है तू,

हर सुबह तेरा ज़िक्र है

हर रात तेरी फ़िक्र है।


ये सिलसिला तुझसे शुरू पर ना जाने क्यों मुझपे खत्म है

तू मुझसे दूर है मगर फिर भी मेरे पास है,

जो वक़्त बीत गया वो आएगा नहीं

मगर फिर भी वो मेरे लिए ख़ास है।

 



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