STORYMIRROR

Aditi Vats

Abstract Classics Inspirational

4  

Aditi Vats

Abstract Classics Inspirational

भुखमरी

भुखमरी

1 min
273

कितना ओखा वक्त आया है 

की देश गरीबी ने खाया है 

की देश भूखमरी ने खाया है 

या खुद उसके अपनो ने उसे खाया है।


सड़क पर जाकर नज़र डालो एक दफा 

हर कोई भूखा और लाचार है आज यहां 

एक वक्त की रोटी खाने के लिए 

कफन लाशों के उतर रह हैं यहां।


हर तबका आज गरीब बन बैठा 

अपनो को बचाने के लिए लूट बैठा 

लाखों में सांसों को खरीद बैठा 

आज यहां हर कोई भूखा और गरीब बैठा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract