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Rajit ram Ranjan

Romance

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Rajit ram Ranjan

Romance

सच कहूं तो शर्मिंदा हूँ !

सच कहूं तो शर्मिंदा हूँ !

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वो चाहती है

मुझे दिलों जान से

डर सा लगने लगा है,

अपनी पहचान से।

 

अब मिलती है ऐसे,

जैसे किसी अनजान से 

अजनबी की तरह मिलता हूँ,

अब मैं दिले-ऐ-नादान से।

 

सच कहूं तो शर्मिंदा हूँ, 

मैं इश्क़ के ईमान से

वो चाहती है 

मुझे दिलों जान से।


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