सबसे जुदा अपनी अदा
सबसे जुदा अपनी अदा
मैंने तो है मस्तमौला ज़िंदगी को भरपूर जिया।
दिल ने जब जो चाहा, मैंने वह तो ज़रूर किया।
अपनी ज़िम्मेदारियों से कभी मुंह है मोड़ा नहीं।
किसी से बेवफ़ाई करके कोई दिल है तोड़ा नहीं।
दोस्ती, रिश्ते, नातों को पूरी शिद्दत से है निभाया।
जितना हो सका, मैंने उतना प्रेम इनको दिखाया।
दुश्मनों के लिए दिल में मैंने रखा नहीं कोई गिला।
जब मुलाक़ात हुई तो पूरी मोहब्बत से गले मिला।
कोई कर्ज़ बाक़ी न रहा, सारे फ़र्ज़ पूरे किये सदा।
तभी तो हैं लोग कहते हैं, सबसे जुदा अपनी अदा।
