सब्जी वाला
सब्जी वाला
सिर पर वो ज़िम्मेदारी धर कर, दौड़ रहा तरकारी भर कर।
धूप में अपनी वो आँखों को मीचे, देखो दौड़ रहा है पीछे पीछे।।
बच्चे भूखे है कुछ लेलो भाई, दो दिन से न हुई कमाई।
मोल भाव मत करो भाई, सिर्फ दो पैसे की ही है कमाई।।
बीच बाजार हुई हाथापाई, छीन गयी दिनभर की कमाई।
घर पहुँचा वो जैसे तैसे, जेब मे बचे न थे उसके पैसे।।
बच्चों को खिला कर वो खाना, सो गया भूखा कर के बहाना।
कल फिर है जल्दी से उठना, दिन भर फिर है धूप में तपना।।
