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Anjana Singh (Anju)

Abstract

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Anjana Singh (Anju)

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सब मोहमाया है

सब मोहमाया है

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जिंदगी इंसान की देखो

बस एक मोह माया है

किसका कौन है यहां पर

कोई नहीं जान पाया है


इंसान के बस में आज है

कल का कहां जान पाया है

यह तो बस एक बोध है

जिसे सब ने निभाया है


कहीं प्रीत की डोर बंधी है

कहीं नफरत भरपाया है

भोग विलास में बंधा इंसान

कहां कुछ जान पाया है


रचे वेद को पढ़ कर देखो

जिसने सबका सार छुपाया है

इंसान‌ तेरा बस वही है 

जो कर्म के बदले पाया है


जो आज तेरा है वह

कल किसी का हिस्सा था

इंसान करना चाहे मनमर्जी की

पर कहां वो कर पाया है


इस धरा पर मानव ने बस

आशियाना अपना सजाया है

हर इंसान की जिंदगी में 

कहीं धूप कहीं छाया है


समय को कहां किसी ने

आज तक रोक पाया है

सुंदर काया भी एक दिन

बन जाती कृश काया है


लोगों की सोच ने 

उसे लालची बनाया है

अब कहां जाए इंसान

सब तो मोह माया है


हर दिन देखो‌ इंसान

यहां वहां भटकता रहता है 

शरीर का साथ भी छोड़ देती 

एक दिन तो साया‌ है


जहां भी देखो वहां

मनुष्य की जिंदगी में

जिसने तहलका सा मचाया है

बस वही तो एक मोह माया है


कोई नहीं उम्र भर यहां

बस ईश्वर की छत्रछाया है

सभी ने तो जिंदगी के बाद 

मौत को अपनाया है


यूं ही मन में ख्याल आया

जीवन को कोई न जान पाया है

क्षणभंगुर इस जीवन में 

भरी पड़ी है मोह माया है


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