सब में सुपर पावर- देखो तराशकर
सब में सुपर पावर- देखो तराशकर
"सुपर पावर"यह शब्द सुनकर ही कितना अच्छा लगता है,
सोच कर ही मन हमारा काल्पनिक दुनिया में खो जाता है।
अगर मिल जाए सुपर पावर हमें तो सोचो क्या-क्या होगा,
दुनिया होगी हमारे कदमों में और मन आसमान में उड़ेगा।
चिंता ना रहेगी किसी बात की जो चाहो वो मिल जाएगा,
झट से हो जाएंँगे काम सारे, बस आराम ही आराम होगा।
निकल जाएंँगे ब्रह्मांड की सैर पर छुट्टियांँ बिताने को हम,
न रहने खाने की चिंता होगी, और न ही पैसा पड़ेगा कम।
आराम की हो जाएगी ज़िंदगी दुश्मन हमसे खौफ खाएंँगे,
चेहरे पर नकाब पहनने वाले असली चेहरा छुपा न पाएंँगे।
कुछ भी खाने का मन है सुपर पावर से हो जाएगा हाज़िर,
लंदन और पेरिस हम ऐसे घूमेंगे जैसे है अपनी ही जागीर।
फोटो खिंचवाएंगे हम, बुर्ज खलीफा की चोटी पर चढ़कर,
एफिल टावर उठा लाएंँगे पेरिस से हम हथेली पर रखकर।
दुनिया के सब अजूबे पलक झपकते ही सामने आ जाएंँगे,
जब होगी बारिश की ज़रूरत बादल को धरती पे ले आएंँगे।
पक्षियों की तरह उड़ेंगे आसमां में, पेड़ पौधों से करेंगे बातें,
सुकून और आराम से कटेगा दिन हमारा और चैन की रातें।
पूरी दुनिया पर चलेगी सत्ता हमारी, सर पर पावर का ताज,
कोई जगह न होगी ऐसी धरा पर जहांँ न होगा अपना राज।
सरल, सुगम ऐसो आराम वाली ज़िंदगी होगी हर शाम यहाँ,
न कोई एहसास होगा न जज़्बात बस पावर का होगा जहांँ।
फिर न कोई दोस्त रहेगा न दुश्मन हमारा, न संघर्ष, न कर्म,
सुपर पावर के अहमं में चूर समझ न पाएंँगे जीवन का मर्म।
क्या है पसीना क्या होती है मेहनत, कभी समझ ना पाएंँगे,
खट्टी, मीठी, चटपटी ज़िंदगी का स्वाद फिर कहांँ ले पाएंँगे।
होती सुखद, कुछ पाने के लिए किए गए संघर्ष की मिठास,
आसानी से मिली चीजें अहमियत खो देती कुछ समय बाद।
सभी अनुभवों के साथ, कतरा-कतरा जीना ही तो ज़िंदगी,
उतार-चढ़ाव के अनुसार स्वयं को ढ़ालना ही तो है ज़िंदगी।
सुपर पावर हाथ में आने से, इन सब से रह जाएंँगे वंचित,
जन्म से मृत्यु तक के सफ़र में, हम क्या कर पाएंँगे संचित।
उस ईश्वर ने तो, हम सभी को, एक नायाब हीरा बनाया है,
तराश कर देखो स्वयं को, सुपर पावर हम में ही समाया है।
असंभव को संभव कर दिखाने का, तूफ़ान है हमारे अंदर,
किंतु हम खुद में कभी झाँकते नहीं, झांँक आते हैं समंदर।
शारीरिक शक्ति से भी ऊपर होती है एक दिव्य सुपर शक्ति,
जो चट्टान काटकर भी रास्ता बना देती,वो है मन की शक्ति।
हिम्मत, हौसला, मेहनत, विश्वास, कर्म ये सब वो हथियार,
जो हमें देते हैं सुपर पावर और लड़ने के लिए करते तैयार।
कर्म को बना लो मूल मंत्र, स्वयं पर रखो हौसला, विश्वास,
मेहनत करो जी तोड़ हिम्मत रखो तो ज़िंदगी होगी उजास।
शक्ति है जब अंदर तो बाहरी सुपर पावर की क्या ज़रूरत,
झेल लेंगे सारे उतार-चढ़ाव ज़िंदगी के,करेंगे इतनी मेहनत।
ठोकरों से ही तो पता चले,क्या होता संभलने का एहसास,
मेहनत से ही तो पता चलता, तन से बहते पसीने का राज।
दुःख आएंँगे ही नहीं तो कैसे पता चलेगी सुख की मिठास,
न भावनाएंँ होंगी, न आंँसू,न जज़्बात, और न ही एहसास।
सुपर पावर से हाजिर हुए खाने में, वो स्वाद कहांँ मिलेगा,
जो बड़े प्यार से हाथों से बनाए गए खाने की प्लेट में होगा।
अपने कमाए मेहनत के पैसे से जब करेंगे दुनिया की सैर,
खुशी से झूम उठा का मन और धरती पर नहीं टिकेंगे पैर।
थोड़ा हंँसना थोड़ा रोना यही तो हैं रास्ते ज़िन्दगी के लिए,
तो अब बताओ कौन सी सुपर पावर बेहतर आपके लिए।
नहीं चाहिए कोई सुपर पावर हम खुद ही हैं सर्वशक्तिमान,
अपनी शक्ति, अपने कर्म से ही हम रास्ते बनाएंँगे आसान।
सपनों में ही अच्छा लगता है बस मिलना यह सुपर पावर,
हर रंग ज़िन्दगी का जीते हुए ही हमें, पूरा करना है सफ़र।
