STORYMIRROR

Yudhveer Tandon

Abstract

4  

Yudhveer Tandon

Abstract

सब एक हैं

सब एक हैं

1 min
452

धरती पर रहने वाले सब जन एक हैं

जातियों को छोड़ो जात मानव एक है

मेलजोल मिलन भेदभाव विभाजन है

मानव की मानवता पहचान ही नेक है


प्रकृति के पंचभूतों से सब जन हैं जने

मानवता के स्वच्छ भाव से मन हैं बने

एक ही है जब मूल आधार सभी का

फिर क्यों एक दूसरे पर ये तन हैं तने


हो मानव में सदैव सर्वधर्म समभाव

सब जन में सहिष्णुता का स्वभाव

विश्व कल्याण मात्र तभी सम्भव है

जब सब में हो कटुम्बकम वसुधैव


क्षेत्रवाद तो भैया एक जहर है धीमा

कितने सपनों का जाने किया कीमा

है कितनी ही मौतों का ये एक कारक

यही वो संघारक जिसने बनाई सीमा



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract