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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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सब भाग्य साथ लाये

सब भाग्य साथ लाये

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सब अपना भाग्य साथ लेकर आये है

कोई शख्स नहीं यहाँ दूसरों के साये है


ये तो यहाँ पर अपनी-अपनी सोच है,

सब ही सम किराये साथ लेकर आये है


न किसी को बड़ा समझो, न ही छोटा,

हर शख्स यहां एक ईश्वर के जाये है


कोई किसी को न देता है, न लेता है,

सब अपना नसीब साथ लेकर आये है


शादी पहले 1रुपया कमाता आदमी

शादी बाद 2 रुपये कमाता आदमी


बच्चे के बाद 4 रुपये कमाता आदमी

खुदा ऐसे ही नहीं बढ़ा देता आमदनी


हर शख्स अपनी किस्मत साथ लाये है

कोई भी नहीं उधार की बांहें फैलाये है


हर शख्स खुदा की अनमोल गाये है

सब ही अपना निवाला साथ लाये है


तू खुद पर कभी गर्व मत कर साखी,

हर शीशा अपनी तकदीर छिपाये है


सब अपना भाग्य साथ लेकर आये है

कोई शख्स नहीं यहाँ दूसरों के साये है



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