सारी-सारी मैं रात जलूँ
सारी-सारी मैं रात जलूँ
तेरा दिल बनके तेरे साथ चलूँ ,
सारी-सारी मैं रात जलूँ ,
तेरे छूने पर भी मैं उफ़ ना करूँ,
तेरे आगे मैं सजदा करूँ।
हर शाम रंगीन लगती है,
इन आँखों में नई मस्ती है,
अपने अधरों से तेरा नाम जपूँ,
सारी - सारी मैं रात जलूँ।
अपना मिलना एक साया है,
जिसमे मेरा ज़िस्म समाया है,
तेरे ज़िस्म का संताप हरूँ,
सारी - सारी मैं रात जलूँ।
इस रात की तन्हाई का,
थोड़ा दर्द है रुसवाई का,
मैं चुपके से तेरा कलमा पढूँ,
सारी-सारी मैं रात जलूँ।

