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सीमा शर्मा सृजिता

Abstract Inspirational

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सीमा शर्मा सृजिता

Abstract Inspirational

सांवली

सांवली

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तुम्हें तुम्हारे रंग से जज करने वाले लोग

 बहुत मिलेंगे , मगर तुम

बस अपने मन की सुनना

अपनी गहरी काली जागती आंखों से 

खूब - खूब सपने बुनना

उन सपनों को पूरा करने के लिए 

हर हद से गुजरना 

सुनो लाडो ! 

किसी की बातें सुन अफसोस मनाओ

इसलिए नहीं जन्मी हो तुम 

हरगिज नहीं 

तुम्हें जीना है 

जैसे तुम चाहो 

तुम्हें उड़ना है 

जितना तुम चाहो 

तुम्हें हंसना है 

तुम्हें खिलखिलाना है 

तुम स्त्री हो 

ईश्वर की सबसे सुन्दर कृति 

तुम खूबसूरत हो

सच, बहुत खूबसूरत 

ये बात तुम्हें दुनिया को नहीं 

बस खुद को समझानी हैं 

बड़ा जंचता हैं ना 

सांवले रंग में कन्हैया

वैसे ही अपने इस सांवले रंग में 

बड़ा जंचती हो तुम



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