सांप दंश
सांप दंश
भगवान की दया से मुझे एक द्वार के बारे में बताया गया। .......मैं दूसरा
दरवाज़ा खोल कर बाहर निकल गया....
पड़ा जब आँख उस साँप की ओर....
मैं उसे देखता रहा.... वो कमरे के अंदर जा
अद्भुत कश्मकश था ओ पल.... ...
जब मैं शान्त और शांत शिखर रह गया....
और वो अपनी चाल आगे की ओर चला गया
मै डरी सहमी सामने उसने दी....
हाथ में एक डंडा लेने के लिए.... उसे देखने के लिए वह चली गई...
मन में भगवान का नाम लेने के लिए... उसकी साख
दिखाने के लिए वह चली गई....
पतरा मेरा काम कर गया.... और ओ पीछे से लटक गया
मेरे नजरों से ओझल... वो सर पलभर में ही
दिल को चेन पहने पल भर में ही 🤗🤗🤗
न था क्वालिटी कोई.... सर्प के आने का....
मैं तो किस्मत से आज बच गया.... ....
अच्छा हो उस ऊपर वाले का 🙏🙏🙏
जो हर समय साथ खेल गया ❤❤❤
✍️✍️✍️✍️ वर्षा रानी दिवाकर 🥰🥰

